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इंसानी खोपड़ियों से बने बर्तन, मानव त्वचा की कुर्सियां; अमेरिका का सबसे खौफनाक सीरियल किलर
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झुर्रियों और ढीली स्किन से हैं परेशान? ये 5 फूड्स खाने के बाद दिखने लगेगा कमसिन

प्रतीकात्मक फोटो

प्रतीकात्मक फोटो

Premature Aging Foods: बुढ़ापा एक ऐसा दौर है जिसे कोई नहीं रोक सकता, लेकिन कई बार लोगों के चेहरे पर इसकी झलक समय से पहले ही दिखने लगती है। जैसे स्किन का ढीला पड़ जाना, झुर्रियों का आना और चेहरे की चमक कम हो जाना। इसकी बड़ी वजह हमारी खराब डाइट, तनावभरी लाइफस्टाइल, पानी कम पीना और फिजिकल एक्टिविटी की कमी है। अगर आप चाहते हैं कि आप अपनी उम्र से छोटे दिखें और लंबे समय तक यंग नजर आएं, तो आपको अपनी दिनचर्या और खानपान में कुछ जरूरी बदलाव करने होंगे।

डाइट में फलों को शामिल करें
संतरा, मौसमी, कीवी, सेब और कीनू जैसे फल विटामिन C और एंटीऑक्सिडेंट्स से भरपूर होते हैं। ये त्वचा को चमकदार बनाते हैं और कोलेजन बनाने में मदद करते हैं, जिससे स्किन टाइट और हेल्दी रहती है। ये फ्री रेडिकल्स से भी लड़ते हैं, जो स्किन की उम्र बढ़ाने का काम करते हैं।

हरी सब्जियों का सेवन बढ़ाएं
पालक, मेथी, ब्रोकली जैसी हरी सब्जियां शरीर को जरूरी विटामिन्स और मिनरल्स देती हैं। ये स्किन के हेल्थ को भी सुधारती हैं और समय से पहले झुर्रियां या ढीलापन आने से रोकती हैं।

ड्राई फ्रूट्स, नट्स और सीड्स खाएं
बादाम, अखरोट, चिया सीड्स, अलसी जैसे नट्स और सीड्स में हेल्दी फैट्स और विटामिन E पाया जाता है। ये स्किन को पोषण देते हैं और लंबे समय तक जवान बनाए रखने में मदद करते हैं। खासकर महिलाओं को 30 की उम्र के बाद इसे डाइट में जरूर शामिल करना चाहिए।

हाइड्रेशन का रखें ध्यान
पर्याप्त पानी पीना स्किन को हाइड्रेटेड रखता है, जिससे स्किन ग्लो करती है और बुढ़ापा दूर रहता है। दिनभर में 8-10 गिलास पानी पीने की आदत डालें।

तनाव कम करें और अच्छी नींद लें
तनाव और नींद की कमी भी स्किन को जल्दी बूढ़ा बना देती है। इसलिए रोज़ाना कम से कम 7-8 घंटे की नींद लें और योग या मेडिटेशन से तनाव कम करें।


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Bindass Bol Dil Se

Written by: Taushif

20 Jul 2025  ·  Published: 05:35 IST

सुबह लहसुन खाने से कैसे बनाएं मजबूत इम्यून सिस्टम और दिल

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फाइल फोटो

Raw Garlic Benefits: आजकल लोग फिट और हेल्दी रहने के लिए अलग-अलग हेल्दी फूड्स अपना रहे हैं. इसमें लहसुन भी एक अहम जगह रखता है. खासतौर पर खाली पेट सुबह उठते ही कच्चा लहसुन खाने से शरीर को कई तरह के फायदे मिलते हैं. यह सिर्फ रसोई में आसानी से मिलने वाली सब्जी नहीं, बल्कि एक नेचुरल सुपरफ़ूड की तरह काम करता है.

कच्चा लहसुन एंटीऑक्सीडेंट और एंटीबैक्टीरियल गुणों से भरपूर होता है. इसे रोजाना खाने से इम्युनिटी बढ़ती है और शरीर संक्रमणों से बेहतर तरीके से लड़ता है. महंगे सप्लीमेंट्स की जगह यह नेचुरल तरीके से शरीर को मजबूत बनाता है. लहसुन ब्लड प्रेशर को भी कंट्रोल करता है. यह ब्लड वेसल्स को रिलैक्स करता है, जिससे हाई ब्लड प्रेशर कम होता है.

रोजाना लहसुन खाने से हृदय की सेहत भी सुधरती है. यह बैड कोलेस्ट्रॉल को घटाता है, आर्टरीज में जमावट नहीं होने देता और दिल के दौरे या स्ट्रोक के खतरे को कम करता है. डाइजेस्टिव हेल्थ के लिए भी लहसुन फायदेमंद है. यह नेचुरल प्रीबायोटिक की तरह काम करता है और आंतों के अच्छे बैक्टीरिया को बढ़ाता है. इसके नियमित सेवन से सूजन कम होती है और पाचन बेहतर होता है.

लहसुन ब्लड शुगर को नियंत्रित करने में भी मदद करता है. यह इंसुलिन के काम में सहायक होता है और डायबिटीज रोगियों को ग्लूकोज नियंत्रित करने में नेचुरल तरीका देता है. इसके अलावा, लहसुन इंफेक्शंस से लड़ने और शरीर को डिटॉक्स करने में भी काम आता है. इसके एंटीवायरल और एंटीबैक्टीरियल गुण फ्लू, सर्दी और अन्य संक्रमणों से बचाव करते हैं.

लहसुन रोजाना खाने से एनर्जी बढ़ती है, ब्लड सर्कुलेशन सुधारता है और ऑक्सीजन की कमी को दूर करता है. साथ ही इसमें मौजूद शक्तिशाली एंटीऑक्सीडेंट उम्र बढ़ने की प्रक्रिया को धीमा करने में भी मदद करते हैं. तो दिन में सिर्फ एक कच्ची लहसुन की कली खाना आपके शरीर को कई तरह से फायदा पहुंचा सकता है. यह नेचुरल, सस्ता और आसान तरीका है हेल्दी रहने का.


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Written by: Taushif

01 Sep 2025  ·  Published: 11:30 IST

धूम्रपान नहीं फिर भी फेफड़ों का कैंसर! जानिए इसके चौंकाने वाले कारण

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Lung Cancer: जब फेफड़ों के कैंसर की बात आती है, तो लोग अक्सर इसे धूम्रपान से जोड़ते हैं। लेकिन हाल के वर्षों में, एक आश्चर्यजनक प्रवृत्ति सामने आई है. अब बड़ी संख्या में ऐसे लोग भी फेफड़ों के कैंसर का शिकार हो रहे हैं जिन्होंने कभी धूम्रपान नहीं किया। अमेरिकन कैंसर सोसाइटी के अनुसार, अमेरिका में फेफड़ों के कैंसर के 20 फीसद मामले ऐसे हैं जिनका धूम्रपान से कोई संबंध नहीं था। कुछ एशियाई देशों में, यह आंकड़ा 50 फीसद तक पहुंच गया है, खासकर महिलाओं में।

इस बदलाव के पीछे कई महत्वपूर्ण कारण हैं, जिनमें सबसे प्रमुख है वायु प्रदूषण। PM2.5 जैसे सूक्ष्म कण, जो सांस के साथ शरीर में प्रवेश करते हैं, फेफड़ों के ऊतकों को नुकसान पहुंचाकर कैंसर के खतरे को बढ़ाते हैं। लंबे समय तक इनके संपर्क में रहने से इस बीमारी के होने का खतरा बहुत बढ़ जाता है। एक अन्य महत्वपूर्ण कारण रेडॉन गैस है, जो मिट्टी और चट्टानों में मौजूद यूरेनियम के टूटने से निकलती है। यह गैस घरों की दीवारों या फर्श की दरारों से प्रवेश कर सकती है और लंबे समय तक इसके संपर्क में रहना फेफड़ों के लिए घातक है।

इसके अलावा, ह्यूमन पेपिलोमावायरस (HPV) और एपस्टीन-बार वायरस (EBV) जैसे वायरस भी इस कैंसर का कारण बन सकते हैं। एक और अहम कारण है सेकेंड हैंड स्मोकिंग, यानी अगर कोई व्यक्ति धूम्रपान नहीं करता, लेकिन ऐसे माहौल में रहता है जहां लोग सिगरेट पीते हैं, तो वह भी इस बीमारी का शिकार हो सकता है। कुछ मामलों में यह बीमारी वंशानुगत यानी जेनेटिक कारणों से भी होती है। वहीं, गांवों या गरीब इलाकों में लकड़ी, गोबर या कोयले से खाना पकाते समय निकलने वाला धुआं भी महिलाओं में इस बीमारी का एक बड़ा कारण है।

यह स्थिति चिकित्सा विज्ञान के लिए भी एक चुनौती है, क्योंकि इससे पता चलता है कि फेफड़ों का कैंसर अब सिर्फ़ धूम्रपान से जुड़ी बीमारी नहीं रह गई है। समय पर जांच, जागरूकता और स्वच्छ वातावरण इस बीमारी को रोकने में अहम भूमिका निभा सकते हैं।


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Written by: Taushif

26 Jul 2025  ·  Published: 04:56 IST

क्या आपकी डाइट में हैं ये गैस बनाने वाले फूड्स? तुरंत पहचानें

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Gas Problem: गैस बनना या गैस छोड़ना (फ्लैट्युलेंस) आमतौर पर लोगों के लिए शर्मिंदगी का कारण बनता है, लेकिन क्या आप जानते हैं कि ये हमारी अच्छी पाचन सेहत का संकेत भी हो सकता है? एक सामान्य इंसान दिन में लगभग 5 से 15 बार गैस छोड़ता है. अगर यह प्रक्रिया बहुत अधिक या बदबूदार न हो, तो यह इस बात का संकेत हो सकता है कि आपका पाचन तंत्र सक्रिय है और आप ऐसे खाद्य पदार्थ खा रहे हैं जो आपकी सेहत के लिए अच्छे हैं.

क्यों बनती है गैस?
गैस बनने की सबसे आम वजह है कॉम्प्लेक्स कार्बोहाइड्रेट और फाइबर से भरपूर भोजन. ये खाद्य पदार्थ पूरी तरह पच नहीं पाते और आंतों में मौजूद अच्छे बैक्टीरिया इन्हें तोड़ते हैं. इस प्रक्रिया में गैस बनती है. आइए जानते हैं कि कौन-कौन से खाद्य पदार्थ ज्यादा गैस बनाते हैं?

1. वसा युक्त और चर्बी वाला मीट
चिकनाई वाला भोजन पाचन को धीमा कर देता है। इससे आंतों में फर्मेंटेशन शुरू हो जाता है, जिससे बदबूदार गैस बन सकती है. खासतौर पर लाल मांस (रेड मीट) में मेथियोनीन नामक अमीनो एसिड पाया जाता है, जो सल्फर से भरपूर होता है. यह हाइड्रोजन सल्फाइड में बदलता है और गैस में सड़े अंडे जैसी बदबू लाता है.

2. बीन्स और दालें
राजमा, लोबिया, चना जैसी दालों में रेफिनोज़ नामक शुगर होती है जिसे शरीर पूरी तरह नहीं तोड़ पाता. यह आंतों में जाकर गैस पैदा करती है.

3. अंडा
अंडा सीधे तौर पर गैस नहीं बनाता, लेकिन इसमें भी मेथियोनीन होता है. अगर इसे बीन्स या मीट के साथ खाया जाए, तो बदबूदार गैस बनने की संभावना बढ़ जाती है.

4. प्याज, लहसुन, हरा प्याज
इनमें फ्रक्टेन नामक कार्बोहाइड्रेट होता है जो पेट फूलने और गैस बनाने का कारण बन सकता है.

5. दूध और डेयरी प्रोडक्ट
गाय और बकरी के दूध में लैक्टोज होता है. दुनिया की करीब 65% आबादी लैक्टोज इन्टॉलरेंट होती है, यानी उनका शरीर दूध की शुगर को नहीं पचा पाता, जिससे गैस और सूजन होती है.

6. गेहूं और साबुत अनाज
गेहूं, ओट्स और ब्रेड जैसे उत्पादों में फ्रक्टेन और ग्लूटेन पाए जाते हैं. जिन लोगों को ग्लूटेन इन्टॉलरेंस है, उन्हें इनसे गैस और पेट फूलने की दिक्कत हो सकती है.

7. ब्रोकोली, फूलगोभी और पत्तागोभी
ये सब्ज़ियां बहुत फाइबर युक्त होती हैं और इनमें सल्फर भी पाया जाता है. यह बदबूदार गैस बनने का एक और कारण है. हालांकि ये सब्जियां पोषक होती हैं, लेकिन इनका सेवन सीमित मात्रा में करें.

8. कुछ फल जैसे सेब, नाशपाती, आम
इन फलों में फ्रक्टोज़ और फाइबर की मात्रा अधिक होती है. कुछ लोगों का शरीर फ्रक्टोज़ को ठीक से पचा नहीं पाता, जिससे गैस बनती है. हालांकि, यह स्थिति लैक्टोज इन्टॉलरेंस की तुलना में कम आम है.


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Written by: Taushif

07 Aug 2025  ·  Published: 06:59 IST